Sunday, 8 December 2019

नागरिकता कानून पर विवाद क्यों? पहले क्या था और अब क्या? 10 पॉइंट में समझें





अनुच्छेद 370, NRC के बाद अब मोदी सरकार एक और बड़ा दांव चलने जा रही है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सोमवार को लोकसभा में नागरिकता संशोधन कानून को पेश करेंगे. इस बिल के तहत देश में आए शरणार्थियों को मिलने वाली नागरिकता को लेकर नियम पूरी तरह से बदल जाएंगे. केंद्र सरकार के इस कानून का विपक्षी पार्टियां विरोध कर रही हैं और इसे भारत के मूल नियमों के खिलाफ बता रही हैं. इस बिल में क्या विवादित है, पहले क्या था और अब क्या होने जा रहा है. जानें बिल से जुड़ी 10 बातें...



  • मोदी सरकार जो नया बिल ला रही है, उसे सिटिजन अमेंडमेंट बिल, 2019 नाम दिया गया है. इस बिल के आने से सिटिजन एक्ट, 1955 में बदलाव होगा.
  • मोदी सरकार के बिल के तहत अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देने की बात कही गई है.
  • इसके साथ ही इन सभी शरणार्थियों को भारत में अवैध नागरिक के रूप में नहीं माना जाएगा. अभी के कानून के तहत भारत में अवैध तरीके से आए लोगों को उनके देश वापस भेजने या फिर हिरासत में लेने की बात है.
  • इन सभी शरणार्थियों को भारत में अब नागरिकता पाने के लिए कम से कम 6 साल का वक्त बिताना होगा. पहले ये समयसीमा 11 साल के लिए थी
  • अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मिजोरम के इनर लाइन परमिट एरिया को इस बिल से बाहर रखा गया है. इसके अलावा ये बिल नॉर्थ ईस्ट के छठे शेड्यूल का भी बचाव करता है.
  • नए कानून के मुताबिक, अफगानिस्तान-बांग्लादेश-पाकिस्तान से आया हुआ कोई भी हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध, ईसाई नागरिक जो कि 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत में आया हो उसे अवैध नागरिक नहीं माना जाएगा.
  • इनमें से जो भी नागरिक OCI होल्डर है, अगर उसने किसी कानून का उल्लंघन किया है तो उसको एक बार उसकी बात रखने का मौका दिया जाएगा.
  • इस बिल का विपक्षी पार्टियां विरोध कर रही हैं और भारत के संविधान का उल्लंघन बता रही हैं. विपक्ष का कहना है कि केंद्र सरकार जो बिल ला रही है, वह देश में धर्म के आधार पर बंटवारा करेगा जो समानता के अधिकार के खिलाफ है.
  • पूर्वोत्तर में इस बिल का सबसे अधिक विरोध हो रहा है, पूर्वोत्तर के लोगों का मानना है कि जैसे राज्यों में बसते हैं ऐसे में ये पूर्वोत्तर राज्यों के लिए ठीक नहीं रहेगा. पूर्वोत्तर में कई छात्र संगठन, राजनीतिक दल इसके विरोध में हैं.
  • एनडीए में भारतीय जनता पार्टी की साथी असम गण परिषद ने भी इस बिल का विरोध किया है, बिल के लोकसभा में आने पर वह गठबंधन से अलग हो गई थी. हालांकि, कार्यकाल खत्म होने पर जब बिल खत्म हुआ तो वह वापस भी आई.

Tuesday, 15 October 2019

अब्दुल कलाम के बारे में 10 खास बातें


एक विलक्षण व्यक्तित्व हमेशा के लिए अलविदा कह गया. भारत की 'अग्नि' मिसाइल को उड़ान देने वाले मशहूर वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम नहीं रहे. शिलॉन्ग आईआईएम में लेक्चर देते हुए उन्हें दिल का दौरा पड़ा. आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर कुछ नहीं कर सके. 83 वर्ष के एक विलक्षण व्यक्तित्व हमेशा के लिए अलविदा कह गया. भारत की 'अग्नि' मिसाइल को उड़ान देने वाले मशहूर वैज्ञानिक और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम नहीं रहे. शिलॉन्ग आईआईएम में लेक्चर देते हुए उन्हें दिल का दौरा पड़ा. आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर कुछ नहीं कर सके. 83 वर्ष के ट्विटर पर उनका परिचय इस तरह है, 'साइंटिस्ट, टीचर, लर्नर, राइटर. भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में सेवाएं दीं. 2020 तक भारत को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए काम कर रहा हूं.'



जानिए कलाम के बारे में 10 खास बातें:

1. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु के रामेश्वरम में हुआ.
2. पेशे से नाविक कलाम के पिता ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे. ये मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे. पांच भाई और पांच बहनों वाले परिवार को चलाने के लिए पिता के पैसे कम पड़ जाते थे इसलिए शुरुआती शिक्षा जारी रखने के लिए कलाम को अखबार बेचने का काम भी करना पड़ा.

4. आठ साल की उम्र से ही कलाम सुबह 4 बचे उठते थे और नहा कर गणित की पढ़ाई करने चले जाते थे. सुबह नहा कर जाने के पीछे कारण यह था कि प्रत्येक साल पांच बच्चों को मुफ्त में गणित पढ़ाने वाले उनके टीचर बिना नहाए आए बच्चों को नहीं पढ़ाते थे. ट्यूशन से आने के बाद वो नमाज पढ़ते और इसके बाद वो सुबह आठ बजे तक रामेश्वरम रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर न्यूज पेपर बांटते थे.
5. कलाम ‘एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी’ में आने के पीछे अपनी पांचवी क्लास के टीचर सुब्रह्मण्यम अय्यर को बताते हैं. वो कहते हैं, ‘वो हमारे अच्छे टीचर्स में से थे. एक बार उन्होंने क्लास में पूछा कि चिड़िया कैसे उड़ती है? क्लास के किसी छात्र ने इसका उत्तर नहीं दिया तो अगले दिन वो सभी बच्चों को समुद्र के किनारे ले गए. वहां कई पक्षी उड़ रहे थे. कुछ समुद्र किनारे उतर रहे थे तो कुछ बैठे थे. वहां उन्होंने हमें पक्षी के उड़ने के पीछे के कारण को समझाया साथ ही पक्षियों के शरीर की बनावट को भी विस्तार पूर्वक बताया जो उड़ने में सहायक होता है. उनके द्वारा समझाई गई ये बातें मेरे अंदर इस कदर समा गई कि मुझे हमेशा महसूस होने लगा कि मैं रामेश्वरम के समुद्र तट पर हूं और उस दिन की घटना ने मुझे जिंदगी का लक्ष्य निर्धारित करने की प्रेरणा दी. बाद में मैंने तय किया कि उड़ान की दिशा में ही अपना करियर बनाउं. मैंने बाद में फिजिक्स की पढ़ाई की और मद्रास इंजीनियरिंग कॉलेज से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई की.’
6. 1962 में कलाम इसरो में पहुंचे. इन्हीं के प्रोजेक्ट डायरेक्टर रहते भारत ने अपना पहला स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी-3 बनाया. 1980 में रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के समीप स्थापित किया गया और भारत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब का सदस्य बन गया. कलाम ने इसके बाद स्वदेशी गाइडेड मिसाइल को डिजाइन किया. उन्होंने अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें भारतीय तकनीक से बनाईं.
7. 1992 से 1999 तक कलाम रक्षा मंत्री के रक्षा सलाहकार भी रहे. इस दौरान वाजपेयी सरकार ने पोखरण में दूसरी बार न्यूक्लियर टेस्ट भी किए और भारत परमाणु हथियार बनाने वाले देशों में शामिल हो गया. कलाम ने विजन 2020 दिया. इसके तहत कलाम ने भारत को विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की के जरिए 2020 तक अत्याधुनिक करने की खास सोच दी गई. कलाम भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार भी रहे.
8. 1982 में कलाम को डीआरडीएल (डिफेंस रिसर्च डेवलपमेंट लेबोरेट्री) का डायरेक्टर बनाया गया. उसी दौरान अन्ना यूनिवर्सिटी ने उन्हें डॉक्टर की उपाधि से सम्मानित किया. कलाम ने तब रक्षामंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. वीएस अरुणाचलम के साथ इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईजीएमडीपी) का प्रस्ताव तैयार किया. स्वदेशी मिसाइलों के विकास के लिए कलाम की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई.
9. इसके पहले चरण में जमीन से जमीन पर मध्यम दूरी तक मार करने वाली मिसाइल बनाने पर जोर था. दूसरे चरण में जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल, टैंकभेदी मिसाइल और रिएंट्री एक्सपेरिमेंट लॉन्च वेहिकल (रेक्स) बनाने का प्रस्ताव था. पृथ्वी, त्रिशूल, आकाश, नाग नाम के मिसाइल बनाए गए. कलाम ने अपने सपने रेक्स को अग्नि नाम दिया. सबसे पहले सितंबर 1985 में त्रिशूल फिर फरवरी 1988 में पृथ्वी और मई 1989 में अग्नि का परीक्षण किया गया. इसके बाद 1998 में रूस के साथ मिलकर भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने पर काम शुरू किया और ब्रह्मोस प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की गई. ब्रह्मोस को धरती, आसमान और समुद्र कहीं भी दागी जा सकती है. इस सफलता के साथ ही कलाम को मिसाइल मैन के रूप में प्रसिद्धि मिली और उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.
10. कलाम को 1981 में भारत सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, पद्म भूषण और फिर, 1990 में पद्म विभूषण और 1997 में भारत रत्न प्रदान किया. भारत के सर्वोच्च पर पर नियुक्ति से पहले भारत रत्न पाने वाले कलाम देश के केवल तीसरे राष्ट्रपति हैं. उनसे पहले यह मुकाम सर्वपल्ली राधाकृष्णन और जाकिर हुसैन ने हासिल किया.

Monday, 2 September 2019

कुछ बातें आपको पता है और कुछ आप अब तक नहीं जानते। कुछ ऐसे तथ्य हैं जिनका भरोसा करना है मुश्किल परंतु वे हैं एकदम सत्य। जानिए ऐसी ही रोचक बातें जो आपके सामान्य ज्ञान में करेंगी जबरदस्त वृद्धि..!

कुछ बातें आपको पता है और कुछ आप अब तक नहीं जानते। कुछ ऐसे तथ्य हैं जिनका भरोसा करना है मुश्किल परंतु वे हैं एकदम सत्य। जानिए ऐसी ही रोचक बातें जो आपके सामान्य ज्ञान में करेंगी जबरदस्त वृद्धि..!



1. दुनिया में 11 प्रतिशत लोग बाएं हाथ का इस्तेमाल करते हैं। 

2. अगस्त में सबसे ज्यादा लोग पैदा होते हैं। 

3. खाने का स्वाद उसमें सलाइवा (लार) मिलने के बाद ही आता है। 

4. औसतन लोग बिस्तर में जाने के 7 मिनिट में सो जाते हैं। 

5. भालू के 42 दांत होते हैं। 

6. शुतुरमुर्ग की आंख उसके दिमाग से बड़ी होती है। 

7. नींबू में स्ट्राबेरी के मुकाबले अधिक शक्कर होती है। 

8. आठ प्रतिशत लोगों में एक अतिरिक्त पसली होती है। 

9. दुनिया के 85 प्रतिशत पौधे समुद्र के अंदर होते हैं।

10. हवायन अल्फाबेट सिर्फ 13 होते हैं। 

11. मिक्की माउस का इटली में नाम टोपोलिनो है। 

12. एक केकड़े का खून रंगहीन होता है। ऑक्सीजन मिलने के बाद यह नीला हो जाता है। 

13. पक्षियों को निगलने के लिए ग्रेविटी की जरूरत होती है। 

14. अंग्रेजी अल्फाबेट का सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला लेटर E है।

15. विश्व की दो सबसे अधिक कॉमन इस्तेमाल होने वाली भाषाएं मैंड्रियन चायनीज, स्पैनिश और अंग्रेजी है।
16. बिल्ली के हर कान में 32 मसल्स होते हैं। 

17. पर्थ ऑस्ट्रेलिया का ऐसा शहर है जहां सबसे तेज हवा बहती है। 

18. इंसान की सबसे छोटी हड्डी कान में होती है। 

19. बिल्लियां अपनी जिंदगी का 66 प्रतिशत हिस्सा सोते हुए गुजारती हैं। 

20. स्विट्जरलैंड में दुनिया में सबसे अधिक चॉकलेट खाई जाती है। यहां हर व्यक्ति एक साल में 10 किलो के औसत से चॉकलेट खाता है।


बने रहिये हमारे साथ हम वापस आयंगे और भी रोचक बाते ले कर

Monday, 22 July 2019

जानिए दिल्ली के बटला हाउस एनकाउंटर की पूरी कहानी

जानिए दिल्ली के बटला हाउस एनकाउंटर की पूरी कहानी

दिल्ली की एक अदालत ने बटला हाउस मुठभेड़ मामले में इंडियन मुजाहिद्दीन के संदिग्ध शहजाद अहमद को गुरुवार को एक पुलिस निरीक्षक की हत्या और अन्य अधिकारियों पर हमले के लिए दोषी ठहराया। अदालत सोमवार को इस मामले में सजा सुनाएगी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेंद्र कुमार शास्त्री ने कहा कि उसे (शहजाद) पुलिस निरीक्षक एमसी शर्मा की हत्या और हेड कांस्टेबल बलवंत सिंह तथा राजबीर सिंह की हत्या के प्रयास के जुर्म में दोषी ठहराया जाता है। उन्होंने कहा कि उसे पुलिस अधिकारियों पर हमला करने और उनकी ड्यूटी में बाधा पहुंचाने के जुर्म में भी दोषी ठहराया जाता है।
न्यायाधीश ने शहजाद को दोषी ठहराने के बाद कहा कि इस मामले में उसे सोमवार (29 जुलाई) को सजा सुनाई जाएगी। अदालत ने शहजाद को हत्या, हत्या के प्रयास, लोक सेवकों पर हमला करने, बाधा पहुंचाने तथा पुलिसकर्मियों को गंभीर रूप से घायल करके उन्हें उनकी ड्यूटी से रोकने का दोषी पाया।
हालांकि अदालत ने शहजाद को भारतीय दंड संहिता की धारा 174ए के तहत आरोप से बरी कर दिया। यह धारा अदालत द्वारा विशेष समय पर विशेष स्थान पर बुलाये जाने के बाद ऐसा करने में नाकाम रहने से जुड़ी है। मुठभेड़ का यह मामला 19 सितंबर 2008 को दिल्ली के जामिया नगर इलाके के बटला हाउस के फ्लैट संख्या एल18 का है। इस मुठभेड़ से छह दिन पहले राजधानी में सीरियल ब्लास्ट हुए थे, जिसमें 26 लोग मारे गये थे और 133 घायल हुए थे।
13 सितंबर 2008 को दिल्ली के करोल बाग, कनाट प्लेस, इंडिया गेट व ग्रेटर कैलाश में सीरियल बम धमाके हुए थे। इन बम धमाकों में 26 लोग मारे गए थे, जबकि 133 घायल हो गए थे। दिल्ली पुलिस ने जांच में पाया था कि बम ब्लास्ट को आतंकी गुट इंडियन मुजाहिद्दीन ने अंजाम दिया है। घटना के 6 दिन बाद 19 सितंबर को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सूचना मिली थी कि इंडियन मुजाहिद्दीन के पांच आतंकी बटला हाउस स्थित एक मकान में मौजूद हैं।





आइये सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं इस पूरे एनकाउंटर की कहानी को...

13 सितंबर 2008
दिल्ली में पांच सिलसिलेवार बम धमाके हुए, जिनमें 26 लोग मारे गए और सौ से अधिक घायल हुए।

19 सितंबर 2008
दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम और जामिया नगर के बटला हाउस के एल-18 मकान में छिपे इंडियन मुजाहिद्दीन के कथित आतंकवादियों में मुठभेड़ हुई। पुलिस ने दावा किया कि मुठभेड़ में दो कथित चरमपंथी मारे गए, दो गिरफ़्तार किए गए और एक फ़रार हो गया। इन्हें दिल्ली धमाकों के लिए ज़िम्मेदार बताया गया।

19 सितंबर 2008
मुठभेड़ में घायल इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा को नजदीकी होली फैमिली अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां आठ घंटे इलाज के बाद उनकी मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक़ उन्हें पेट, जांघ और दाहिने हाथ में गोली लगी थी। उनकी मौत अधिक खून बहने के कारण हुई। पुलिस ने मोहन चंद्र शर्मा की मौत के लिए शहज़ाद अहमद को ज़िम्मेदार ठहराया

21 सितंबर 2008
पुलिस ने कहा कि उसने इंडियन मुजाहिदुदीन के तीन कथित चरमपंथियों और बटला हाउस के एल-18 मकान की देखभाल करने वाले व्यक्ति को गिरफ़्तार किया। दिल्ली में हुए विस्फोटों के आरोप में पुलिस ने कुल 14 लोग गिरफ़्तार किए। ये गिरफ़्तारियां दिल्ली और उत्तर प्रदेश से की गईं। मानवाधिकार संगठनों ने बटला हाउस एनकाउंटर को फर्जी बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मामले की न्यायिक जांच की माँग की।

21 मई 2009
दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से पुलिस के दावों की जांच कर दो महीने में रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा।

22 जुलाई 2009
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस को क्लीन चिट दी गई।

26 अगस्त 2009
दिल्ली हाईकोर्ट ने एनएचआरसी की रिपोर्ट स्वीकार करते हुए न्यायिक जांच से इनकार किया।

30 अक्टूबर 2009
हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी न्यायिक जांच से इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच से पुलिस का मनोबल प्रभावित होगा।

19 सितंबर 2011
बटला हाउस एनकाउंटर के दो साल पूरे होने पर दिल्ली की जामा मस्जिद के पास मोटर साइकिल सवारों ने विदेशी पर्यटकों पर गोलीबारी की। इसमें दो ताइवानी नागरिक घायल हुए।


6 फरवरी 2010
पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चंद्र शर्मा की मौत के सिलसिले में पुलिस ने शहज़ाद अहमद को गिरफ़्तार किया।

20 जुलाई 2013
अदालत ने शहज़ाद अहमद के मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद फ़ैसला सुरक्षित किया।


25 जुलाई 2013 
अदालत ने शहजाद अहमद को दोषी क़रार दिया।


विवाद


  • - कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने एनकाउंटर को फर्जी बताकर विवाद को जन्म दिया, हालांकि उनकी ही पार्टी ने उनके इस बयान से किनारा कर लिया।
  • - समाजवादी पार्टी ने भी एनकाउंटर में पुलिस की भूमिका पर शक जताते हुए न्यायिक जांच की मांग की। मगर तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने एनकाउंटर को वास्तविक बताते हुए मामले को फिर खोलने से इनकार कर दिया।
  • - एनकाउंटर के खिलाफ प्रदर्शन के लिए कई सामाजिक और गैरसरकारी संगठन सड़कों पर उतर आए।
  • - पुलिस पर फर्जी एनकाउंटर करने का आरोप लगा। एक एनजीओ की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को निर्देश दिया कि वह एनकाउंटर में पुलिस की भूमिका की जांच करे और 2 महीने के भीतर रिपोर्ट दे। अपनी रिपोर्ट में एनएचआरसी ने पुलिस को क्लीन चिट दी, जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने मामले में न्यायिक जांच की मांग ठुकरा दी।
  • -केस की सुनवाई के दौरान शहजाद के वकील ने अदालत में दलील दी थी की पुलिस के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जो ये साबित करता हो कि एनकाउंटर के वक़्त शहजाद मौके पर मौजूद था। शहजाद के वकील ने पुलिस की इस दलील को भी खारिज कर दिया कि शहजाद का पासपोर्ट बटला हाउस के मकान नंबर एप-18 से मिला था।
  • -वकील ने दावा किया कि पुलिस ने पासपोर्ट गलत तरीके से हासिल किया था और इसी वजह से बरामदगी के दौरान किसी गवाह के हस्ताक्षर नहीं हैं। शहजाद के वकील ने ये सवाल भी उठाया है कि जब पुलिस ने एनकाउंटर के दौरान मकान नंबर एल 18 को चारों तरफ से घेर रखा था, तो शहजाद वहां से भाग कैसे गया।


Chandrayaan-2: भारत इतिहास रचने को तैयार, आज होगा लॉन्च मिशन

Chandrayaan-2:
भारत इतिहास रचने को तैयार, आज होगा लॉन्च मिशन

इसरो ने एक हफ्ते के अंदर सभी तकनीकी खामियों को ठीक कर लिया है. श्रीहरिकोटा के सतीश धवन सेंटर से चंद्रयान-2 को भारत के सबसे ताकतवर जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा.


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने 18 जुलाई 2019 को घोषणा किया कि चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा से 22 जुलाई को होगी. इसरो ने ट्वीट किया कि चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग 15 जुलाई को होनी थी, जो तकनीकी खराबी के कारण टाल दी गई थी.
इसरो ने एक हफ्ते के अंदर सभी तकनीकी खामियों को ठीक कर लिया है. इसरो की ओर से एक आधिकारिक सूचना जारी की गई है जिसमें कहा गया है की 22 जुलाई 2019 को दोपहर 2:43 बजे चंद्रयान-2 को लॉन्च किया जाएगा.

श्रीहरिकोटा के सतीश धवन सेंटर से चंद्रयान-2 को भारत के सबसे ताकतवर जीएसएलवी मार्क-3 रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा. चंद्रयान-2 की यात्रा ऐसे में चार दिन आगे बढ़ जाएगी. चंद्रयान-2 पहले चांद पर 06 सितंबर को पहुंचने वाला था, लेकिन 22 जुलाई को लॉन्चिंग होने पर ये 10 सितंबर या 11 सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचेगा.




चंद्रयान-2 क्या है?
चंद्रयान-2 एक अंतरिक्ष यान है. इसके तीन सबसे अहम हिस्से लैंडर, ऑर्बिटर और रोवर हैं. चंद्रयान-2 दस साल के भीतर भारत का चंद्रमा पर भेजा जाने वाला दूसरा अभियान है. भारत ने इससे पहले अक्टूबर 2008 में चंद्रयान-1 चंद्रमा की कक्षा में भेजा था. भारत चंद्रयान-2 की सफलता के साथ ही अमेरिका, रूस और चीन के बाद धरती के इस उपग्रह पर अंतरिक्ष यान उतारने वाला चौथा देश बन जाएगा.
चंद्रयान-2 का वजन 3,877 किलो होगा. इसरो ने पहले सफल चंद्रमा मिशन - चंद्रयान-1 का प्रक्षेपण किया था जिसने चंद्रमा के 3,400 चक्कर लगाए. चंद्रयान-1 (29 अगस्त 2009 तक) 312 दिनों तक काम करता रहा. यह चंद्रयान-1 मिशन से करीब तीन गुना ज्यादा है.

Sunday, 7 July 2019

भारतीय संविधान अनुच्छेद 15 - धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध



(1) राज्य, किसी नागरिक के विरुद्ध के केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा।


(2) कोई नागरिक केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर--
     (क) दुकानों, सार्वजनिक भोजनालयों, होटलों और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों में प्रवेश, या
     (ख) पूर्णतः या भागतः राज्य-निधि से पोषित या साधारण जनता के प्रयोग के लिए समर्पित कुओं, तालाबों, स्नानघाटों,       सड़कों और सार्वजनिक समागम के स्थानों के उपयोग,
     के संबंध में किसी भी निर्योषयता, दायित्व, निर्बन्धन या शर्त के अधीन नहीं होगा।

(3) इस अनुच्छेद की कोई बात राज्य को स्त्रियों और बालकों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी।

(4) इस अनुच्छेद की या अनुच्छेद 29 के खंड (2) की कोई बात राज्य को सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए नागरिकों के किन्हीं वर्गों की उन्नति के लिए या अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष उपबंध करने से निवारित नहीं करेगी।

Sunday, 23 September 2018

Current Affairs 21-Sept-2018

1. हाल ही में स्मिता पाटिल मेमोरियल अवार्ड 2018 से किसे सम्मानित किया गया?
उत्तर- अनुष्का शर्मा
अभिनेत्री अनुष्का शर्मा को स्मिता पाटिल मेमोरियल अवार्ड 2018 से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान प्रियदर्शनी अकादमी गोल्डन अवार्ड्स के दौरान 19 सितम्बर को दिया गया। प्रियदर्शनी अकादमी एक गैर-लाभकारी, सामाजिक व शैक्षणिक संगठन है।
2. बाँध पुनर्वास व सुधार प्रोजेक्ट को किस वैश्विक वित्तीय संस्था द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है?
उत्तर- विश्व बैंक
19 सितम्बर को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने बाँध पुनर्वास व सुधार प्रोजेक्ट संशोधित लागत अनुमान को मंज़ूरी दी, यह संशोधित लागत अनुमान 3,466 करोड़ रुपये है। यह राशि विश्व बैंक द्वारा 198 बांधों की सुरक्षा व कार्य में सुधार करने के लिए प्रदान की जाएगी। इस प्रोजेक्ट में 7 राज्यों केरल, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिल नाडू, कर्नाटक, झारखण्ड और उत्तराखंड के बाँध शामिल हैं। इस 3,466 करोड़ रुपये की राशी में से 2,628 करोड़ रुपये विश्व बैंक द्वारा दिए जायेंगे, शेष 747 करोड़ रुपये का वहां सम्बंधित राज्यों द्वारा किया जायेगा।
3. मेरकोम इंडिया रिसर्च के अनुसार वर्तमान में भारत में कितनी सौर उर्जा क्षमता स्थापित है?
उत्तर- 25 गीगावाट
मेरकोम इंडिया रिसर्च के अनुसार भारत में अब तक 25 गीगावाट सौर उत्पादन क्षमता की स्थापना की गयी है। सौर उर्जा उत्पादन में देश में कर्नाटक पहले स्थान पर है, इसके बाद तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और राजस्थान हैं। मेरकोम के अनुसार 2018 में 8.3 गीगावाट सौर उत्पादन क्षमता की स्थापना की जा सकती है। कुल 25 गीगावाट में से 5 गीगावाट की स्थापना इस वर्ष के पहले हिस्से में ही की गयी है।
4. अविईन्द्र 18 नामक युद्ध अभ्यास किन दो देशों के बीच शुरू हुआ?
उत्तर- भारत और रूस
भारतीय वायुसेना और रूसी वायुसेना के बीच संयुक्त अभ्यास 17 सितम्बर को रूस के लिपेत्स्क में शुरू हुआ। इस युद्ध अभ्यास के दूसरे चरण का आयोजन भारत में जोधपुर में 10 से 22 दिसम्बर के बीच किया जायेगा। इस युद्ध अभ्यास का उद्देश्य आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन के लिए तैयारी करना है। युद्ध अभ्यास के अलावा वार्तालाप तथा खेल-कूद गतिविधियों का आयोजन भी किया जायेगा। अविईन्द्र युद्ध अभ्यास भारत और रूसे के बीच वायुसेना स्तरीय युद्ध अभ्यास है। पहले अविईन्द्र युद्ध अभ्यास का आयोजन 2014 में किया गया है। इसका आयोजन प्रत्येक दो वर्ष किया जाता है।
5. भारत द्वारा 4 परमाणु सयंत्र IAEA के निगरानी में रखे जाने के बाद, IAEA की निगरानी में रखे गये परमाणु सयंत्रों की कुल संख्या कितनी होगी?
उत्तर- 26
भारत ने 4 परमाणु सयंत्रों को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु उर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में रखने के फैसला किया है। इसके साथ ही IAEA की निगरानी में कुल सयंत्रों को संख्या 26 हो जाएगी। इसकी घोषणा परमाणु उर्जा विभाग के अध्यक्ष शेखर बासु ने 19 सितम्बर, 2018 को की।
6. हाल ही में सुर्ख़ियों में रहा झारसुगुडा एअरपोर्ट किस राज्य में स्थित है?
उत्तर- ओडिशा
ओडिशा विधानसभा ने नव-निर्मित झारसुगुडा एअरपोर्ट का नाम स्वतंत्रता सेनानी वीर सुरेन्द्र साईं के नाम पर रखने का फैसला किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 22 सितम्बर, 2018 को इस हवाईअड्डे का उद्घाटन करेंगे। जुलाई, 2018 में केंद्र ने ओडिशा को एअरपोर्ट का नाम बदलने के लिए प्रस्ताव पारित करने के लिए कहा था। यह बीजू पटनायक अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के बाद ओडिशा का दूसरा एअरपोर्ट होगा।
वीर सुरेन्द्र साईं का जन्म जनवरी, 1809 में ओडिशा के संबलपुर में हुआ था। उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध लड़ते हुए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था। उन्होंने अंग्रेजों से पश्चिमी ओडिशा के क्षेत्रों की रक्षा की। उनकी मृत्यु 23 मई, 1884 को असीरगढ़ जेल में हुई थी।
7. किस वेसेल के महिला क्रू ने तेंजिन नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड 2018 को जीता?
उत्तर- INSV तरिणी
INSV तरिणी के क्रू में केवल महिलाएं ही थीं, उन्हें तेंजिन नोर्गे नेशनल एडवेंचर अवार्ड 2018 से सम्मानित किया जायेगा। यह पुरस्कार उन्हें 25 सितम्बर को राष्ट्रपति भवन में प्रदान किया जायेगा। जल, पृथ्वी वायु में साहसिक कार्य के लिए यह देश का सर्वोच्च पुरस्कार है। इन महिला नौसैनिक अफसरों ने नाविक सागर परिक्रमा प्रोजेक्ट के लिए 194 दिन समुद्र में व्यतीत किये। इन महिला अफसरों ने 8 महीने में INSV तरिणी पर विश्व की परिक्रमा की। यह टीम 21 मई को परिक्रमा को पूरा करके गोवा में पहुंची थी। 72वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य पर इस महिला टीम को नव सेना मैडल से सम्मानित किया गया था। इस टीम की सदस्य लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी, लेफ्टिनेंट पी. स्वाति, लेफ्टिनेंट प्रतिभा जम्वाल, लेफ्टिनेंट विजया देवी, सब लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता और लेफ्टिनेंट बी. ऐश्वर्या हैं।
8. स्वतंत्रता सेनानी दोलागोबिन्दा प्रधान का हाल ही में निधन हुआ, वे किस राज्य से सम्बंधित थे?
उत्तर- ओडिशा
93 वर्षीय दोलागोबिन्दा प्रधान का निधन 17 सितम्बर, 2018 को भुबनेश्वर में हुआ। वे ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री भी थे। उनका जन्म 7 जून, 1929 को कट्टक में हुआ था, वे महात्मा गाँधी के अनुयायी थे। उन्होंने 1942 में स्कूल छोड़कर ‘भारत छोड़ो आन्दोलन’ में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्हें ब्रिटिश सरकार ने 3 वर्ष कारावास की सजा दी थी। वे दो बार 1980 और 1990 में कट्टक सदर विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधानसभा अध्यक्ष चुने गये थे।
9. रक्षा की स्थायी समिति का चेयरमैन किये नियुक्त किया गया?
उत्तर- कलराज मिश्र
पूर्व केन्द्रीय मंत्री कलराज मिश्र को रक्षा की स्थायी समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उन्हें बी.सी. खंडूरी के स्थान पर नियुक्त किया गया। बी. सी. खंडूरी ने अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण रिपोर्ट्स जारी की थी। मार्च 2018 में उन्होंने में अपनी रिपोर्ट में बताया था की भारतीय सेना के पास मौजूद 68% उपकरण काफी पुराने है। इसके अतिरिक्त चिंतामणि मालवीय को कोयला व इस्पात पैनल का अध्यक्ष नियुक्त किया है। वित्तीय समिति और विदेशी मामले समिति में कोई भी परिवर्तन नहीं किया गया है। वित्तीय समिति के अध्यक्ष वीरप्पा मोइली हैं, जबकि विदेशी मामले समिति के अध्यक्ष कांग्रेस नेता शशि थरूर हैं।
10. केन्द्रीय सतर्कता आयोग का नया सचिव किसे नियुक्त किया गया?
उत्तर- अनिंदो मजुमदार
अनिंदो मजुमदार को केन्द्रीय सतर्कता आयोग का नया सचिव नियुक्त किया गया है, वे 1985 बैच के अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश कैडर के आईएएस अफसर हैं। इससे पहले वे दिल्ली के वित्तीय आयुक्त थे। दिल्ली से पहले वे अंदमान व निकोबार द्वीपसमूह के मुख्य सचिव थे। केन्द्रीय सतर्कता आयोग का गठन 1964 में सरकार में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए किया गया था। यह एक स्वायत्त संगठन है। इस पर भारत सरकार के अधीन सभी सतर्कता गतिविधियों की निगरानी का दायित्व है|